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    श्री विरागोदय तीर्थ धर्मधाम पथरिया

तीर्थक्षेत्र

श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्रेयांसगिरि सलेहा




श्रेयांस गिरी, अतिशय जैन तीर्थ, पन्ना, म.प्र. 
🍂 आज से कई वर्ष पूर्व सुप्रसिद्ध जैन मुनि विमल सागर जी महाराज अपने प्रवास के क्रम में अचानक नचना पहुंचे।   मध्यप्रदेश के पन्ना जिला स्थित इस क्षेत्र में पहुंचने के लिए जैसे उन्हें ईश्वरीय प्रेरणा हुई हो।वहां उन्हें शीरा पहाड़ की कंदराओं में कई जैन तीर्थंकरों की पाषाण प्रतिमाएं मिलीं। पुरातत्व विभाग और जैन समाज के विद्वानों ने उन्हें गुप्ताकाल के समकालीन बताया। एक तपोभूमि के रूप में चिन्हित होने के बाद इस स्थल का महत्व बढ़ गया। श्रद्धालुओं का आवागमन भी होने लगा।  
 🍂 विमल सागर जी को यहां पांच गुफाएं मिलीं। *गुफा क्रमांक दो में भगवान महावीर स्वामी और मगरमच्छ गुफा (मगरमच्छ के आकार की गुफा) में भगवान आदिनाथ जी की खड्गाषन मूर्ति थी।* इसी प्रकार गुफा क्रमांक एक और तीन में भी बेशकीमती जैन प्रतिमाएं थीं तो कुछ मूर्तियां गुफाओं के बाहर पहाड़ी में चट्टानों पर उकेरी गई थीं। नचना की जैन तीर्थ के रूप में प्रसिद्धी विमल सागर जी के शिष्य विराग सागर जी के यहां पहुंचने पर उत्तरोत्तर बढ़ी।  स्थानीय जैन धर्मावलंबियों का मत है कि उन्हें यहां आने की प्रेरणा अपने गुरु से प्राप्त हुई। विराग सागर जी ने इसे अतिशय क्षेत्र माना और तपोभूमि के रूप में इसका महत्व स्वीकार करते हुए सोये हुए तप को जगा दिया। इसके बाद कई वर्षों तक उन्होंने यहां चातुर्मास व्यतीत किए।
🍂 उन्होंने ही शीरा पहाड़ का नामकरण श्रेयांस गिरी किया जो कि २४ जैन तीर्थंकरों में से एक हैं। इस दौरान मौजूद गुफाओं का जीर्णोंद्धार भी कराया गया।